योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

पश्चिम में धर्म प्रचार करने जाने का मेरा एक उद्देश्य अपने देशवासियों के भरण-भोषण के लिए साधन खोजना था। उनका दुःख-दैन्य देखकर मैं कभी-कभी सोचता हूं, फेंक दो सब यह पूजा-पाठ का आडम्बर-शंख फूंकना, घंटी बजाना और दीप लेकर आरती उतारना बन्द करो...निजी मुक्ति की साधना का, शास्त्र के ज्ञान का घमंड छोड दो-गांव-गांव घूमकर दरिद्र की सेवा में जीवन अर्पित कर दो-धिक्कार है कि हमारे देश में दलित की, विपन्न की, संतप्त की चिंता कोई नहीं करता। जो राष्ट्र की रीढ़ हैं,


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पश्चिम में धर्म प्रचार करने जाने का मेरा एक उद्देश्य अपने देशवासियों के भरण-भोषण के लिए साधन खोजना था। उनका दुःख-दैन्य देखकर मैं कभी-कभी सोचता हूं, फेंक दो सब यह पूजा-पाठ का आडम्बर-शंख फूंकना, घंटी बजाना और दीप लेकर आरती उतारना बन्द करो...निजी मुक्ति की साधना का, शास्त्र के ज्ञान का घमंड छोड दो-गांव-गांव घूमकर दरिद्र की सेवा में जीवन अर्पित कर दो-धिक्कार है कि हमारे देश में दलित की, विपन्न की, संतप्त की चिंता कोई नहीं करता। जो राष्ट्र की रीढ़ हैं,


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