जिसके परिश्रम से अन्न उत्पन्न होता है, जिसके एक दिन काम बन्द करते ही महानगर त्राहि-त्राहि कर उठते हैं-उसकी व्यथा समझने वाला कौन है हमारे देश में ? कौन उसका सुख-दुःख बंटाने को तैयार है ? देखो, कैसे हिन्दुओं की सहानुभूति-शून्यता के कारण मद्रास प्रदेश में सहóांे अछूत ईसाई धर्म-परिवर्तन करने को तैयार हुए हैं। इसलिए हुए हैं कि तम उन्हें अपनी सम्वेदना नहीं दे सकते। तुम उनसे निरन्तर कहते रहते हो, -छूओ मत। यह मत छुओ !’ इस देश
जिसके परिश्रम से अन्न उत्पन्न होता है, जिसके एक दिन काम बन्द करते ही महानगर त्राहि-त्राहि कर उठते हैं-उसकी व्यथा समझने वाला कौन है हमारे देश में ? कौन उसका सुख-दुःख बंटाने को तैयार है ? देखो, कैसे हिन्दुओं की सहानुभूति-शून्यता के कारण मद्रास प्रदेश में सहóांे अछूत ईसाई धर्म-परिवर्तन करने को तैयार हुए हैं। इसलिए हुए हैं कि तम उन्हें अपनी सम्वेदना नहीं दे सकते। तुम उनसे निरन्तर कहते रहते हो, -छूओ मत। यह मत छुओ !’ इस देश