योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



विवेकानन्द जब भी अपने को थोड़-सा स्वस्थ अनुभव करते थे, कोई न कोई काम प्रारम्भ कर देते थे। बिना काम किए उन्हें चैन नहीं पड़ता था। मार्च से जुलाई तक के चार महीनों में भी वे बीमारी के बावजूद बराबर परिश्रम करते रहे। उन्होंने कुछ पुस्तकें लिखने की योजना स्थिर की थी। थोड़े-से नोट्स अवश्य तैयार किए, पर वे एक भी पुस्तक नहीं लिख पाए।

जून प्रारम्भ होते ही उन्होंने मठ तथा रामकृष्ण मिशन संबंधी बातों में भी दिलचस्पी लेनी बन्द कर


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विवेकानन्द जब भी अपने को थोड़-सा स्वस्थ अनुभव करते थे, कोई न कोई काम प्रारम्भ कर देते थे। बिना काम किए उन्हें चैन नहीं पड़ता था। मार्च से जुलाई तक के चार महीनों में भी वे बीमारी के बावजूद बराबर परिश्रम करते रहे। उन्होंने कुछ पुस्तकें लिखने की योजना स्थिर की थी। थोड़े-से नोट्स अवश्य तैयार किए, पर वे एक भी पुस्तक नहीं लिख पाए।

जून प्रारम्भ होते ही उन्होंने मठ तथा रामकृष्ण मिशन संबंधी बातों में भी दिलचस्पी लेनी बन्द कर


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