विवेकानन्द ने क्या लिखा है। परन्तु समय पर अनेक विवेकानन्द जन्म लेंगे।’’
दिन ज्यों-त्यों करके बीता, रात को वे अपने कमरे में जाकर लेटे तो नौ बजे उनका देहान्त हो गया। उस समय उनकी आयु उन्तालीस बरस थी...
खोल टूट गया और अग्नि बिखर गई।
उनके बाद इस अग्नि को किसने धारण किया ?
बाद की बात
‘‘सत्य जितना महान होता है, उतना ही सहज बोध-गम्य होता है-स्वयं अपने अस्तित्व के समान सहज।’’
-विवेकानन्द
विवेकानन्द की मृत्यु के तीन बरस बाद वे घटनाएं घटित होने लगीं,
विवेकानन्द ने क्या लिखा है। परन्तु समय पर अनेक विवेकानन्द जन्म लेंगे।’’
दिन ज्यों-त्यों करके बीता, रात को वे अपने कमरे में जाकर लेटे तो नौ बजे उनका देहान्त हो गया। उस समय उनकी आयु उन्तालीस बरस थी...
खोल टूट गया और अग्नि बिखर गई।
उनके बाद इस अग्नि को किसने धारण किया ?
बाद की बात
‘‘सत्य जितना महान होता है, उतना ही सहज बोध-गम्य होता है-स्वयं अपने अस्तित्व के समान सहज।’’
-विवेकानन्द
विवेकानन्द की मृत्यु के तीन बरस बाद वे घटनाएं घटित होने लगीं,