जिनकी प्रतीक्षा में उन्होंने महासंघर्ष का सूत्रपात किया था और नये भारत का स्वप्न देखा था। डाॅ. पट्टाभि सीतारामय्या ने अपनी ‘कांगे्रस का इतिहास’ पुस्तक में लिखा है:
‘‘बीसवीं सदी के पहले पांच साल लार्ड कर्जन के दमनपूर्ण शासन के थे। कलकत्ता कोरपोरेशन के अधिकारों में कमी, सरकारी गुप्त समितियांे का कानून, विश्वविद्यालयों को सरकारी नियत्रंण में लाना, जिससे शिक्षा महंगी हो गई, भारतीयों के चरित्र को ‘असत्यमय’ बताना, बारह सुधारों का बजट,
जिनकी प्रतीक्षा में उन्होंने महासंघर्ष का सूत्रपात किया था और नये भारत का स्वप्न देखा था। डाॅ. पट्टाभि सीतारामय्या ने अपनी ‘कांगे्रस का इतिहास’ पुस्तक में लिखा है:
‘‘बीसवीं सदी के पहले पांच साल लार्ड कर्जन के दमनपूर्ण शासन के थे। कलकत्ता कोरपोरेशन के अधिकारों में कमी, सरकारी गुप्त समितियांे का कानून, विश्वविद्यालयों को सरकारी नियत्रंण में लाना, जिससे शिक्षा महंगी हो गई, भारतीयों के चरित्र को ‘असत्यमय’ बताना, बारह सुधारों का बजट,