बांट दिया गया था। न सिर्फ बंगाल के हिन्दू और मुसलमानों ने इस योजना का विरोध किया बल्कि, पट्टाभि सीतारमय्या लिखते हैं, ‘‘सम्पूर्ण भारत ने बंगाल के सवाल को अपना सवाल बना लिया। प्रत्येक प्रान्त ने बंगाल के प्रश्न के साथ अपनी समस्याओं को और जोड़कर आन्दोलन को ज़्यादा गहरा रंग दे दिया। ‘कैनल कालोनाइजेशन बिल’ ने पंजाब के सैनिक प्रदेश में जनता के अन्दर एक नया तूफान खड़ा कर दिया, जिसके सिलसिले में लाला लाजपतराय और सरदार अजीतसिंह को देश निकाले की सज़ा मिली।’’ (पृष्ठ 65)
बांट दिया गया था। न सिर्फ बंगाल के हिन्दू और मुसलमानों ने इस योजना का विरोध किया बल्कि, पट्टाभि सीतारमय्या लिखते हैं, ‘‘सम्पूर्ण भारत ने बंगाल के सवाल को अपना सवाल बना लिया। प्रत्येक प्रान्त ने बंगाल के प्रश्न के साथ अपनी समस्याओं को और जोड़कर आन्दोलन को ज़्यादा गहरा रंग दे दिया। ‘कैनल कालोनाइजेशन बिल’ ने पंजाब के सैनिक प्रदेश में जनता के अन्दर एक नया तूफान खड़ा कर दिया, जिसके सिलसिले में लाला लाजपतराय और सरदार अजीतसिंह को देश निकाले की सज़ा मिली।’’ (पृष्ठ 65)