उसी दिन आन्ध्र में हरिसर्वोत्तमराव तथा अन्य व्यक्ति पकड़े गए। पांच दिनों की सुनवाई के बाद लोकमान्य तिलक को छः साल की सज़ा मिली। 1897 में छुट्टी हुई छः मास की कैद भी इसमें जोड़ दी गई। आन्ध्र के श्री हरिसर्वोत्तम को नौ महीने की सज़ा मिली। सरकार ने इतनी थोड़ी सज़ा के खिलाफ अपील की और हाईकोर्ट ने उनकी सज़ा बढ़ाकर तीन साल कर दी। राजद्रोह के लिए पांच साल सज़ा देना तो उन दिनों मामूली बात थी। इसके बाद जल्दी ही राजद्रोह देश से गायब हो
उसी दिन आन्ध्र में हरिसर्वोत्तमराव तथा अन्य व्यक्ति पकड़े गए। पांच दिनों की सुनवाई के बाद लोकमान्य तिलक को छः साल की सज़ा मिली। 1897 में छुट्टी हुई छः मास की कैद भी इसमें जोड़ दी गई। आन्ध्र के श्री हरिसर्वोत्तम को नौ महीने की सज़ा मिली। सरकार ने इतनी थोड़ी सज़ा के खिलाफ अपील की और हाईकोर्ट ने उनकी सज़ा बढ़ाकर तीन साल कर दी। राजद्रोह के लिए पांच साल सज़ा देना तो उन दिनों मामूली बात थी। इसके बाद जल्दी ही राजद्रोह देश से गायब हो