सांघातिक प्रभाव आज सर्वत्र देखा जा रहा है यों कहें कि आदि ही से उस संदेश में जोखिम भरा था।’’ (विवेकानन्द, पृष्ठ 116)
इसमें संदेह नहीं कि विवेकानन्द का संदेश सारे देश में फेला और उसके फलस्वरूप वे घटनाएं जिनकी विवेकानन्द ने प्रतीक्षा की थी, न सिर्फ घटित हुई बल्कि उन्होंने इतने ज़बरदस्त आन्दोलन का रूप धारण किया कि उसके आगे ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा और उसने अपनी बंग-भंग योजना रद्द कर दी। 1857 के स्वाधीनता-संग्राम के बाद यह पहला संघर्ष था,
सांघातिक प्रभाव आज सर्वत्र देखा जा रहा है यों कहें कि आदि ही से उस संदेश में जोखिम भरा था।’’ (विवेकानन्द, पृष्ठ 116)
इसमें संदेह नहीं कि विवेकानन्द का संदेश सारे देश में फेला और उसके फलस्वरूप वे घटनाएं जिनकी विवेकानन्द ने प्रतीक्षा की थी, न सिर्फ घटित हुई बल्कि उन्होंने इतने ज़बरदस्त आन्दोलन का रूप धारण किया कि उसके आगे ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा और उसने अपनी बंग-भंग योजना रद्द कर दी। 1857 के स्वाधीनता-संग्राम के बाद यह पहला संघर्ष था,