योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

जिसमें ब्रिटिश साम्राज्यवाद पराजित हुआ और इससे हमारे समूचे राष्ट्र का गौरव बढ़ा। लेकिन इसमें संदेह नहीं कि विवेकानन्द के संदेश में यह जोखिम निहित थी कि राष्ट्रवाद की भावना बढ़ते-बढ़ते अंधराष्ट्रवाद में परिणित हो जाए। विवेकानन्द ने राष्ट्र के सोते हुए सिंह को जगाया और उसमें आत्मविश्वास पैदा किया कि यूनान, मिó और रोम मिट गए हैं, लेकिन लगातार विदेशी आक्रमणों के बावजूद हमारा राष्ट्र अब भी जीवित है और जीवित रहेगा। कारण यह कि


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जिसमें ब्रिटिश साम्राज्यवाद पराजित हुआ और इससे हमारे समूचे राष्ट्र का गौरव बढ़ा। लेकिन इसमें संदेह नहीं कि विवेकानन्द के संदेश में यह जोखिम निहित थी कि राष्ट्रवाद की भावना बढ़ते-बढ़ते अंधराष्ट्रवाद में परिणित हो जाए। विवेकानन्द ने राष्ट्र के सोते हुए सिंह को जगाया और उसमें आत्मविश्वास पैदा किया कि यूनान, मिó और रोम मिट गए हैं, लेकिन लगातार विदेशी आक्रमणों के बावजूद हमारा राष्ट्र अब भी जीवित है और जीवित रहेगा। कारण यह कि


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