योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

हमारे इस विशाल देश में महान संस्कृति की एक निरन्तर धारा युग-युग से बह रही है वही राष्ट्र की रीढ़ है, वही उसकी शक्ति है। कोई भी विदेशी शक्ति न उसे मिटा सकती है और न उस राष्ट्र को हमेशा के लिए गुलाम बनाकर रख सकती है। विवेकानन्द के इसी संदेश को ‘तराना-ए-हिंदी’ (1905 ) का रूप देकर इकबाल गुनगुनाया:

सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा

हम बुलबले हैं इसकी यह गुलस्तां हमारा

यूनान-मिó-रोमा सब मिट गए जहां से

बाकी मगर है अब तक नामो-निंशा हमारा


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हमारे इस विशाल देश में महान संस्कृति की एक निरन्तर धारा युग-युग से बह रही है वही राष्ट्र की रीढ़ है, वही उसकी शक्ति है। कोई भी विदेशी शक्ति न उसे मिटा सकती है और न उस राष्ट्र को हमेशा के लिए गुलाम बनाकर रख सकती है। विवेकानन्द के इसी संदेश को ‘तराना-ए-हिंदी’ (1905 ) का रूप देकर इकबाल गुनगुनाया:

सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा

हम बुलबले हैं इसकी यह गुलस्तां हमारा

यूनान-मिó-रोमा सब मिट गए जहां से

बाकी मगर है अब तक नामो-निंशा हमारा


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