योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

मानव-प्रेम और विश्व-शान्ति का आदर्श प्रस्तुत किया। अद्वैतवाद का भी चूंकि यही आदर्श है, इसलिए रामकृष्ण परमहंस और विवेकानन्द ने स्वत: रोमां रोलां का ध्यान आकर्षित किया और उन्होंने इन दोनों भारतीय महापुरूषों की जीवनियां लिखकर उनके माध्यम से विश्व-बंधुत्व के आदर्श को प्रचारित-प्रसारित किया। उनका मत था कि जिस प्रकार धर्मांधता विश्व मानव को सम्प्रदायों में विभाजित करती है और वे सम्प्रदाय व्यर्थ ही आपस में लड़ते-झगड़ते हैं उसी प्रकार राष्ट्रवाद भी एक सांघातिक प्रवृत्ति है,


1065 of 1197

मानव-प्रेम और विश्व-शान्ति का आदर्श प्रस्तुत किया। अद्वैतवाद का भी चूंकि यही आदर्श है, इसलिए रामकृष्ण परमहंस और विवेकानन्द ने स्वत: रोमां रोलां का ध्यान आकर्षित किया और उन्होंने इन दोनों भारतीय महापुरूषों की जीवनियां लिखकर उनके माध्यम से विश्व-बंधुत्व के आदर्श को प्रचारित-प्रसारित किया। उनका मत था कि जिस प्रकार धर्मांधता विश्व मानव को सम्प्रदायों में विभाजित करती है और वे सम्प्रदाय व्यर्थ ही आपस में लड़ते-झगड़ते हैं उसी प्रकार राष्ट्रवाद भी एक सांघातिक प्रवृत्ति है,


1065 of 1197