जो विश्व मानव को विभिन्न राष्ट्रों की भौगोलिक सीमाओं में बांटती है। इससे एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र पर चढ़ दौड़ती है और इससे प्रेम के बजाए घृणा, द्वेष तथा हिंसा ही अधिक बढ़ती है। यही कारण है कि रोमां रोलां को विवेकानन्द के संदेश में जोखिम दिखाई दी, जिसका स्पष्टीकरण उन्होंने यों किया है:
‘‘यह जोखिम हमारी जानी हुई है-हमने ऐसे बहुत से आदर्शों को, पवित्रतम आदर्शों को, अत्यंत घृण्य जातीय भावनाओं के पोषण के लिए विकृत किए जाते
जो विश्व मानव को विभिन्न राष्ट्रों की भौगोलिक सीमाओं में बांटती है। इससे एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र पर चढ़ दौड़ती है और इससे प्रेम के बजाए घृणा, द्वेष तथा हिंसा ही अधिक बढ़ती है। यही कारण है कि रोमां रोलां को विवेकानन्द के संदेश में जोखिम दिखाई दी, जिसका स्पष्टीकरण उन्होंने यों किया है:
‘‘यह जोखिम हमारी जानी हुई है-हमने ऐसे बहुत से आदर्शों को, पवित्रतम आदर्शों को, अत्यंत घृण्य जातीय भावनाओं के पोषण के लिए विकृत किए जाते