बताना वास्वत में उत्पीड़ितों की राष्ट्रीय चेतना तथा शोषितों की वर्ग-चेतना को कुंठित करना है। इससे जाने अनजाने साम्राज्यवादियों और शोषकों अर्थात् देशी-विदेशी प्रतिक्रियावादियों ही का हित पोषण होता है। जब तक राष्ट्रों की मुक्ति और
213 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
समाजवादी क्रान्ति द्वारा उत्पीड़न तथा शोषण का अन्त नहीं हो जाता और वर्ग-विभाजित समाज के बजाए वर्गहीन समाज अस्तित्व में नहीं आ जाता, तब तक मानव एकता का स्वप्न साकार
बताना वास्वत में उत्पीड़ितों की राष्ट्रीय चेतना तथा शोषितों की वर्ग-चेतना को कुंठित करना है। इससे जाने अनजाने साम्राज्यवादियों और शोषकों अर्थात् देशी-विदेशी प्रतिक्रियावादियों ही का हित पोषण होता है। जब तक राष्ट्रों की मुक्ति और
213 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
समाजवादी क्रान्ति द्वारा उत्पीड़न तथा शोषण का अन्त नहीं हो जाता और वर्ग-विभाजित समाज के बजाए वर्गहीन समाज अस्तित्व में नहीं आ जाता, तब तक मानव एकता का स्वप्न साकार