ब्रह्मसमाज चंद साल पहले आदि ब्रह्मसमाज और अखिल भारतीय ब्रह्मसमाज में विभाजित हो गया था। पहले के नेता देवेन्द्रनाथ ठाकुर और दूसरे के केशवचन्द्र सेन थे। केशव बहुत बड़े वक्ता थे और उस समय उनकी ख्याति शिखर पर थी। बंगाली नौजवान उनसे बेहद प्रभावित थे। रोमां रोलां का कथन है कि नरेन्द्रनाथ उनसे ईष्र्या करते थे और स्वयं केशव बनने की महत्वकांक्षा रखते थे। लेकिन इसके बावजुद वह उनके अखिल भारतीय ब्रह्मसमाज के सदस्य नहीं बने। कारण
ब्रह्मसमाज चंद साल पहले आदि ब्रह्मसमाज और अखिल भारतीय ब्रह्मसमाज में विभाजित हो गया था। पहले के नेता देवेन्द्रनाथ ठाकुर और दूसरे के केशवचन्द्र सेन थे। केशव बहुत बड़े वक्ता थे और उस समय उनकी ख्याति शिखर पर थी। बंगाली नौजवान उनसे बेहद प्रभावित थे। रोमां रोलां का कथन है कि नरेन्द्रनाथ उनसे ईष्र्या करते थे और स्वयं केशव बनने की महत्वकांक्षा रखते थे। लेकिन इसके बावजुद वह उनके अखिल भारतीय ब्रह्मसमाज के सदस्य नहीं बने। कारण