यह था कि अखिल भारतीय ब्रह्मसमाज राजा राममोहन राय के आदर्श और परम्परा से हट चुका था। केशव और उनके अनुयायी ईसाइयत में रंगे हुए थे और उनका चलन सनातन हिदू धर्म की उच्चतक मान्यताओं के प्रतिकूल था। लेकिन नरेन्द्र की बचपन ही से इन मान्यताओं में आस्था थी। संदेहवादी होते हुए भी उसमें दूसरे नौजवानों-सी उच्छृंखलता और अराजकता न थी।
नरेन्द्रनाथ ब्रह्मसमाज की रविवारीय उपासना में शामिल होता था और अपने मधुर कंठ से ब्रह्म संगीत सुनकर
यह था कि अखिल भारतीय ब्रह्मसमाज राजा राममोहन राय के आदर्श और परम्परा से हट चुका था। केशव और उनके अनुयायी ईसाइयत में रंगे हुए थे और उनका चलन सनातन हिदू धर्म की उच्चतक मान्यताओं के प्रतिकूल था। लेकिन नरेन्द्र की बचपन ही से इन मान्यताओं में आस्था थी। संदेहवादी होते हुए भी उसमें दूसरे नौजवानों-सी उच्छृंखलता और अराजकता न थी।
नरेन्द्रनाथ ब्रह्मसमाज की रविवारीय उपासना में शामिल होता था और अपने मधुर कंठ से ब्रह्म संगीत सुनकर