ने गांधी जैसे व्यक्ति से अधिक सतर्क होने के कारण राजनीतिक कार्य मंे धर्म-भावना के प्राधान्य की वह चेष्टा कभी उचित न मानी जो गांधी ने की थी, जैसा कि अमेरिका से आए उनक पत्रों से प्रकट है-वह निरन्तर अपने और राजनीति के मध्य नंगी तलवार रखे रहे-‘मुझे छूना नहीं-राजनीति के प्रलाप से मुझे कोई मतलब नहीं।’’ (वही, पृष्ठ 166-67)
इसका मतलब है कि रोमां रोलां ने विवेकानन्द के स्वामी वेश अर्थात् धार्मिक पक्ष ही को देखा। उनकी दृष्टि
ने गांधी जैसे व्यक्ति से अधिक सतर्क होने के कारण राजनीतिक कार्य मंे धर्म-भावना के प्राधान्य की वह चेष्टा कभी उचित न मानी जो गांधी ने की थी, जैसा कि अमेरिका से आए उनक पत्रों से प्रकट है-वह निरन्तर अपने और राजनीति के मध्य नंगी तलवार रखे रहे-‘मुझे छूना नहीं-राजनीति के प्रलाप से मुझे कोई मतलब नहीं।’’ (वही, पृष्ठ 166-67)
इसका मतलब है कि रोमां रोलां ने विवेकानन्द के स्वामी वेश अर्थात् धार्मिक पक्ष ही को देखा। उनकी दृष्टि