यह देखने में असमर्थ रही कि विवेकानन्द ने धर्म के माध्यम से हमारी राजनीतिक लड़ाई सचेत रूप से लड़ी। यह ठीक है कि रोमां रोलां के चिन्तन में जो असंगति थी, वह किसी हद तक विवेकानन्द के चिन्तन में भी थी। हम पहले कह चुके हैं कि विवेकानन्द हमारे देश के उभरते हुए पूंजीवादी वर्ग के प्रवक्ता थे और अपने इस वर्ग स्वभाव ही के कारण उनका चिन्तन धार्मिक अद्वैतवाद से आगे बढ़ पाया-भौतिकवाद के कगार पर आकर रूक गया। उन्होंने यह तो कहा कि पचास बरस तक और सब देवताओं को उठाकर ताक पर रख दो,
यह देखने में असमर्थ रही कि विवेकानन्द ने धर्म के माध्यम से हमारी राजनीतिक लड़ाई सचेत रूप से लड़ी। यह ठीक है कि रोमां रोलां के चिन्तन में जो असंगति थी, वह किसी हद तक विवेकानन्द के चिन्तन में भी थी। हम पहले कह चुके हैं कि विवेकानन्द हमारे देश के उभरते हुए पूंजीवादी वर्ग के प्रवक्ता थे और अपने इस वर्ग स्वभाव ही के कारण उनका चिन्तन धार्मिक अद्वैतवाद से आगे बढ़ पाया-भौतिकवाद के कगार पर आकर रूक गया। उन्होंने यह तो कहा कि पचास बरस तक और सब देवताओं को उठाकर ताक पर रख दो,