214 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
उनके नाम पर अब वही फेलाई जा रही है। अपने आदर्शवादी चिन्तन के कारण रोमां रोलां ने हमारे राष्ट्रीय संघर्ष के इतिहास को भी समझने में भूल की। बंग-भंग योजना के विरूद्व जो जन-आन्दोलन उठा था जिसके आगे ब्रिटिश साम्राज्यवाद को घुटने टेकने पड़े थे, उसके नेता बालगंगाधर तिलक, विपिन चन्द्रपाल और लाला लाजपतराय थे और इसी से बाल, पाल, लाल-तीन नाम हिमालय से कन्याकुमारी तक गूंज उठे थे। रोमां रोलां ने तिलक
214 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
उनके नाम पर अब वही फेलाई जा रही है। अपने आदर्शवादी चिन्तन के कारण रोमां रोलां ने हमारे राष्ट्रीय संघर्ष के इतिहास को भी समझने में भूल की। बंग-भंग योजना के विरूद्व जो जन-आन्दोलन उठा था जिसके आगे ब्रिटिश साम्राज्यवाद को घुटने टेकने पड़े थे, उसके नेता बालगंगाधर तिलक, विपिन चन्द्रपाल और लाला लाजपतराय थे और इसी से बाल, पाल, लाल-तीन नाम हिमालय से कन्याकुमारी तक गूंज उठे थे। रोमां रोलां ने तिलक