भी ऐसा हुआ। इन दोनों तत्त्वों को जब तक अलग-अलग न कर लिया जाए तब तक विवेकानन्द और गांधी की अथवा तिलक और गांधी की भूमिका को समझ लेना सम्भव नहीं है। और इसे समझ लेना आवश्यक है क्योंकि समझे राष्ट्र-चेतना और वर्ग-चेतना कुंठित तथा विकृत रहेगी।
कांगे्रस की स्थापना 1885 में हुई तो वह दलाल तत्त्वों का संगठन था। इन तत्त्वों ने अतीत से अपना संबंध विच्छेद करके अंग्रेज़ के आगे आत्मसमर्पण कर दिया था। उनकी दृष्टि में पश्चिम की प्रत्येक
भी ऐसा हुआ। इन दोनों तत्त्वों को जब तक अलग-अलग न कर लिया जाए तब तक विवेकानन्द और गांधी की अथवा तिलक और गांधी की भूमिका को समझ लेना सम्भव नहीं है। और इसे समझ लेना आवश्यक है क्योंकि समझे राष्ट्र-चेतना और वर्ग-चेतना कुंठित तथा विकृत रहेगी।
कांगे्रस की स्थापना 1885 में हुई तो वह दलाल तत्त्वों का संगठन था। इन तत्त्वों ने अतीत से अपना संबंध विच्छेद करके अंग्रेज़ के आगे आत्मसमर्पण कर दिया था। उनकी दृष्टि में पश्चिम की प्रत्येक