योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

वस्तु श्रेष्ठ और अपना जो कुछ था वह सब हेय था। उनका विश्वास था कि अंगे्रज़ हम जंगली और असभ्य लोगों को सभ्य बनाने के लिए ही सात समुद्र पर से आए हैं। उनसे सहयोग करना ही हमारे उद्वार तथा उन्नति का एकमात्र मार्ग है। अतएव कांगे्रस अधिवेशनों से राजभक्ति का परिचय देकर पद और स्वायत्त शासन के कुछ अधिकार मांगे जाते थे।

लेकिन बाद में देशभक्त भी कांगे्रस मंे आए और धीरे-धीरे उनका ज़ोर इतना बढ़ा कि बंग-भंग येाजना के विरूद्व जन-आन्दोलन


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वस्तु श्रेष्ठ और अपना जो कुछ था वह सब हेय था। उनका विश्वास था कि अंगे्रज़ हम जंगली और असभ्य लोगों को सभ्य बनाने के लिए ही सात समुद्र पर से आए हैं। उनसे सहयोग करना ही हमारे उद्वार तथा उन्नति का एकमात्र मार्ग है। अतएव कांगे्रस अधिवेशनों से राजभक्ति का परिचय देकर पद और स्वायत्त शासन के कुछ अधिकार मांगे जाते थे।

लेकिन बाद में देशभक्त भी कांगे्रस मंे आए और धीरे-धीरे उनका ज़ोर इतना बढ़ा कि बंग-भंग येाजना के विरूद्व जन-आन्दोलन


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