रूप से आगे बढ़ रहा था और जब युद्व की परिस्थितियां राष्ट्र-चेतना और वर्ग-चेतना को को तीव्र बना रही ािीं तो ब्रिटिश शासकों जनवरी, 1915 में गांधी को दक्षिण अफ्रीका से लाकर भारतीय राजनीति के अखाड़े में उतार दिया। अंग्रेज़ का गौरव-गान करने और पाश्चात्य जीवन-पद्वति को श्रेष्ठ मानने का युग अब बीत चुका था। गांधी को बताया गया कि भारत की अपढ़ जनता अपनी प्राचीन परम्परा का अनुसार अवतार पुरूष अथवा राजपुरूष को सहज में नेता मान लेती है,
रूप से आगे बढ़ रहा था और जब युद्व की परिस्थितियां राष्ट्र-चेतना और वर्ग-चेतना को को तीव्र बना रही ािीं तो ब्रिटिश शासकों जनवरी, 1915 में गांधी को दक्षिण अफ्रीका से लाकर भारतीय राजनीति के अखाड़े में उतार दिया। अंग्रेज़ का गौरव-गान करने और पाश्चात्य जीवन-पद्वति को श्रेष्ठ मानने का युग अब बीत चुका था। गांधी को बताया गया कि भारत की अपढ़ जनता अपनी प्राचीन परम्परा का अनुसार अवतार पुरूष अथवा राजपुरूष को सहज में नेता मान लेती है,