इसलिए उसने लंगोटी पहनकर महात्माई का रूप धरा और भारतीय संस्कृति से झूठा संबंध जोड़ा। हुआ यह कि सूरत अधिवेशन में जिन अंगे्रज़-भक्तों को निकाला गया अब गांधी की अगुवाई में कांगे्रस की बागडोर फिर उन्हीं के हाथ में आ गई।
विवेकानन्द के काम को भीतर से नष्ट करने के लिए एनी बेसेन्ट और सी. एफ. एंड्रयूज़ सरीखे लोगों को गांधी का सहयोगी बनाया गया। हुुआ यह कि विचार की दृष्टि से उन्नीसवीं सदी के अन्त तक विवेकानन्द ने देश को जहां पहुंचा दिया था, गांधी वहां से ढाई सौ बरस पीछे ले गया।
इसलिए उसने लंगोटी पहनकर महात्माई का रूप धरा और भारतीय संस्कृति से झूठा संबंध जोड़ा। हुआ यह कि सूरत अधिवेशन में जिन अंगे्रज़-भक्तों को निकाला गया अब गांधी की अगुवाई में कांगे्रस की बागडोर फिर उन्हीं के हाथ में आ गई।
विवेकानन्द के काम को भीतर से नष्ट करने के लिए एनी बेसेन्ट और सी. एफ. एंड्रयूज़ सरीखे लोगों को गांधी का सहयोगी बनाया गया। हुुआ यह कि विचार की दृष्टि से उन्नीसवीं सदी के अन्त तक विवेकानन्द ने देश को जहां पहुंचा दिया था, गांधी वहां से ढाई सौ बरस पीछे ले गया।