आश्यर्च की बात है कि जब गांधी जी ने राष्ट्रीय आन्दोलन को क्रान्तिकारी मोड़ से हटाकर दूसरा मोड़ देना चाहा तो उन्होंने गीता पर ‘अनासक्ति योग’ नाम से एक व्याख्या लिखी। इसमें उन्होंने गीता द्वारा अहिंसा का समर्थन किया और यों कहा कि कुरूक्षेत्र का युद्व असल में कोई युद्व नहीं था, यह तो मन और-इंद्रियों का युद्व मात्र था।’’ (पृष्ठ 6)
गांधी द्वाा कांग्रेस और खिलाफत के समझौते को बहुत बड़ी राष्ट्रीय एकता का नाम दिया जाता है। वास्तव
आश्यर्च की बात है कि जब गांधी जी ने राष्ट्रीय आन्दोलन को क्रान्तिकारी मोड़ से हटाकर दूसरा मोड़ देना चाहा तो उन्होंने गीता पर ‘अनासक्ति योग’ नाम से एक व्याख्या लिखी। इसमें उन्होंने गीता द्वारा अहिंसा का समर्थन किया और यों कहा कि कुरूक्षेत्र का युद्व असल में कोई युद्व नहीं था, यह तो मन और-इंद्रियों का युद्व मात्र था।’’ (पृष्ठ 6)
गांधी द्वाा कांग्रेस और खिलाफत के समझौते को बहुत बड़ी राष्ट्रीय एकता का नाम दिया जाता है। वास्तव