216 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
गांधी ने गीता और वेदान्त दर्शन की अहिंसावादी व्याख्या करके संघर्षरत जनता को मानसिक रूप से निःशस्त्र किया। 1929 में वाइसराय की ट्रेन को बम से उड़ाने की घटना के बाद गांधी ने ‘यंग इंडिया’ में ‘कल्ट आफ दि बम’ (बम का सिद्वात) नाम से जो लेख लिखा और नमक सत्याग्रह शुरू करने से पहले वाइसराय के नाम जो पत्र लिखा उससे स्पष्ट है कि उसकी लड़ाई ब्रिटिश साम्राज्यवाद की संगठित प्रतिक्रियावादी हिंसा के विरूद्व नहीं,
216 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
गांधी ने गीता और वेदान्त दर्शन की अहिंसावादी व्याख्या करके संघर्षरत जनता को मानसिक रूप से निःशस्त्र किया। 1929 में वाइसराय की ट्रेन को बम से उड़ाने की घटना के बाद गांधी ने ‘यंग इंडिया’ में ‘कल्ट आफ दि बम’ (बम का सिद्वात) नाम से जो लेख लिखा और नमक सत्याग्रह शुरू करने से पहले वाइसराय के नाम जो पत्र लिखा उससे स्पष्ट है कि उसकी लड़ाई ब्रिटिश साम्राज्यवाद की संगठित प्रतिक्रियावादी हिंसा के विरूद्व नहीं,