बल्कि हमारे राष्ट्र की क्रान्तिकारी हिंसा के विरूद्व थी। भगतसिंह और उनके साथियों ने गांधी की इस क्रान्ति-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी भूमिका को भली भांति समझ लिया था। ‘कल्ट आफ दी बम’ के उत्तर में उन्होंने ‘फिलासफी आफ दि बम’ पैम्पलेट प्रकाशित किया जो 30 जनवरी, 1930 को गुप्त रूप से देश-भर में बांटा गया था। वह यों शुरू होता है:
‘‘हाल ही की घटनाओं से जिनमें वाइससराय की ट्रेन को बम से उड़ाने की कोशिश पर कांगे्रस का प्रस्ताव और
बल्कि हमारे राष्ट्र की क्रान्तिकारी हिंसा के विरूद्व थी। भगतसिंह और उनके साथियों ने गांधी की इस क्रान्ति-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी भूमिका को भली भांति समझ लिया था। ‘कल्ट आफ दी बम’ के उत्तर में उन्होंने ‘फिलासफी आफ दि बम’ पैम्पलेट प्रकाशित किया जो 30 जनवरी, 1930 को गुप्त रूप से देश-भर में बांटा गया था। वह यों शुरू होता है:
‘‘हाल ही की घटनाओं से जिनमें वाइससराय की ट्रेन को बम से उड़ाने की कोशिश पर कांगे्रस का प्रस्ताव और