में निकल आएंगे। देश में आंतकवादी आन्दोलन की शुरूआत इसी प्रकार हुई है। यह आंदोलन क्रान्ति का एक आवश्यक तथा अनिवार्य चरण है। न आतंकवाद पूर्ण आंदोलन का एक आवश्यक तथा अनिवार्य चरण है। न आतंकवाद पूर्ण क्रान्ति है और न ही आतंकवाद के बिना क्रान्ति सम्पन्न हो सकती है। आज तक संसार में जितनी क्रान्तियां हुई हैं, उनसे हमारे इस दृष्टिकोण की पुष्टि होती है। आतंक आतताइयों के मन में भय उत्पन्न करता है। इससे यह सिद्व हो जाता है कि जनता
में निकल आएंगे। देश में आंतकवादी आन्दोलन की शुरूआत इसी प्रकार हुई है। यह आंदोलन क्रान्ति का एक आवश्यक तथा अनिवार्य चरण है। न आतंकवाद पूर्ण आंदोलन का एक आवश्यक तथा अनिवार्य चरण है। न आतंकवाद पूर्ण क्रान्ति है और न ही आतंकवाद के बिना क्रान्ति सम्पन्न हो सकती है। आज तक संसार में जितनी क्रान्तियां हुई हैं, उनसे हमारे इस दृष्टिकोण की पुष्टि होती है। आतंक आतताइयों के मन में भय उत्पन्न करता है। इससे यह सिद्व हो जाता है कि जनता