योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

अपनी वर्तमान स्थिति से संतुष्ट नहीं है और वह इसे बदल देने के लिए तड़प रही है। दूसरे देशों में भी यह आन्दोलन बढ़ते-बढ़ते क्रान्ति और आर्थिक स्वाधीनता लाने का कारण बनेगी। क्रान्तियों के दृष्टिकोण की व्याख्या ऊपर कर दी गई है। देश के लिए वे जो कुछ करना चाहते हैं वह इससे स्पष्ट है। दुनिया-भर में मज़दूरों-किसानों और शासक वर्गों के दरम्यान जो संघर्ष चल रहा है, वे उससे रहनुमाई हासिल करते हैं। उन्हें विश्वास है कि उन्होंने अपने ध्येय की पूर्ति के लिए जो ढंग अपनाया है,


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अपनी वर्तमान स्थिति से संतुष्ट नहीं है और वह इसे बदल देने के लिए तड़प रही है। दूसरे देशों में भी यह आन्दोलन बढ़ते-बढ़ते क्रान्ति और आर्थिक स्वाधीनता लाने का कारण बनेगी। क्रान्तियों के दृष्टिकोण की व्याख्या ऊपर कर दी गई है। देश के लिए वे जो कुछ करना चाहते हैं वह इससे स्पष्ट है। दुनिया-भर में मज़दूरों-किसानों और शासक वर्गों के दरम्यान जो संघर्ष चल रहा है, वे उससे रहनुमाई हासिल करते हैं। उन्हें विश्वास है कि उन्होंने अपने ध्येय की पूर्ति के लिए जो ढंग अपनाया है,


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