योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

जुड़ जाना हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन के विकास की एक स्वाभाविक प्रक्रिया थी। कारण यह कि अक्टूबर, 1917 की रूसी क्रान्ति के बाद समाजवादी क्रान्ति को क्या माक्र्सवादी विचारधारा और कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व के बिना किसी जनवादी क्रान्ति का भी सफल होना सम्भव नहीं रह गया था।

पर देश का दुर्भाग्य यह है कि 1930 के बाद चैथे दशक में जब माक्र्सवादी

218 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

विचाराधारा ने जोर पकड़ा और जन-आंदोलन ने मज़दूर यूनियनों


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जुड़ जाना हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन के विकास की एक स्वाभाविक प्रक्रिया थी। कारण यह कि अक्टूबर, 1917 की रूसी क्रान्ति के बाद समाजवादी क्रान्ति को क्या माक्र्सवादी विचारधारा और कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व के बिना किसी जनवादी क्रान्ति का भी सफल होना सम्भव नहीं रह गया था।

पर देश का दुर्भाग्य यह है कि 1930 के बाद चैथे दशक में जब माक्र्सवादी

218 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

विचाराधारा ने जोर पकड़ा और जन-आंदोलन ने मज़दूर यूनियनों


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