योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

उनकी औद्योगिक सभ्यता निश्चित रूप से हमारी सामंती सभ्यता से श्रेष्ठ थी। अर्थतंत्र और व्यापार पर उनका अधिकार था। इसके अलावा उन्होंने हमारे आत्मविश्वास को तोड़ने अर्थात् हमारी राष्ट्रीय भावना को नष्ट करने के लिए सांस्कृतिक आक्रमण भी शुरू कर दिया। इस क्षेत्र में उनका नारा था कि हम मूर्ति-पूजक तथा जंगली है, वे हमें सभ्य बनाने के मिशन पर आए हैं, लूट-खसोट उनका उद्देश्य कदाचित नहीं है।

हमारे देश के उभरते हुए पूंजीपति वर्ग को


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उनकी औद्योगिक सभ्यता निश्चित रूप से हमारी सामंती सभ्यता से श्रेष्ठ थी। अर्थतंत्र और व्यापार पर उनका अधिकार था। इसके अलावा उन्होंने हमारे आत्मविश्वास को तोड़ने अर्थात् हमारी राष्ट्रीय भावना को नष्ट करने के लिए सांस्कृतिक आक्रमण भी शुरू कर दिया। इस क्षेत्र में उनका नारा था कि हम मूर्ति-पूजक तथा जंगली है, वे हमें सभ्य बनाने के मिशन पर आए हैं, लूट-खसोट उनका उद्देश्य कदाचित नहीं है।

हमारे देश के उभरते हुए पूंजीपति वर्ग को


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