नरेन्द्र लगन का पक्का था। उसी दिन से ध्यानानुराग में रंग गया। थोड़ा खाना, चटाई पर सोना, सफेद धोती और चद्दर पहनना और शारीरिक कठोरता का पालन करना उसका नियम बन गया।
उसने अपने घर के निकट नानी के मकान में एक कमरा किराये पर ले रखा
29 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
था। परिवार के लोग समझते थे कि घर पर पढ़ाई की असुविधा के कारण ही नरेन्द्र अलग रहने लगा है। विश्वनाथ बाबू ने बेटे की स्वाधीनता के कभी हस्तक्षेप नहीं किया था। इसलिए नरेन्द्र अध्ययन,
नरेन्द्र लगन का पक्का था। उसी दिन से ध्यानानुराग में रंग गया। थोड़ा खाना, चटाई पर सोना, सफेद धोती और चद्दर पहनना और शारीरिक कठोरता का पालन करना उसका नियम बन गया।
उसने अपने घर के निकट नानी के मकान में एक कमरा किराये पर ले रखा
29 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
था। परिवार के लोग समझते थे कि घर पर पढ़ाई की असुविधा के कारण ही नरेन्द्र अलग रहने लगा है। विश्वनाथ बाबू ने बेटे की स्वाधीनता के कभी हस्तक्षेप नहीं किया था। इसलिए नरेन्द्र अध्ययन,