योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

अपने नग्न रूप में हमारे सामने है। अधिक टीका-टिप्पणी की आवश्यकता नहीं।

सोचने समझने की बात यह है कि नेतृत्व गांधी के हाथ में आने से पूंजीवादी नव-जागरण की प्रक्रिया अधूरी रह गई और समाजवादी नव-जागरण का सूत्रपात ही नहीं हुआ। गांधी का विरोध सुभाष ने किया और इसी कारण तिलक के बाद जनता में उनका आदर कांगे्रस के किसी भी नेता से अधिक है। लेकिन सुभाष माक्र्सवादी नहीं थे, इसलिए वे राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय स्थिति का सही मूल्यांकन


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अपने नग्न रूप में हमारे सामने है। अधिक टीका-टिप्पणी की आवश्यकता नहीं।

सोचने समझने की बात यह है कि नेतृत्व गांधी के हाथ में आने से पूंजीवादी नव-जागरण की प्रक्रिया अधूरी रह गई और समाजवादी नव-जागरण का सूत्रपात ही नहीं हुआ। गांधी का विरोध सुभाष ने किया और इसी कारण तिलक के बाद जनता में उनका आदर कांगे्रस के किसी भी नेता से अधिक है। लेकिन सुभाष माक्र्सवादी नहीं थे, इसलिए वे राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय स्थिति का सही मूल्यांकन


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