नहीं कर पाए। 1929 के लाहौर अधिवेशन में मुकम्मिल आज़ादी का प्रस्ताव पास हो जाने के बाद उन्होंने मज़दूरों, किसानों तथा नौजवानों को संगठित करने और समानान्तर सरकार बनाने का प्रस्ताव तो रखा, पर इस प्रस्ताव के रद्द हो जाने के बाद स्वयं उन्होंने भी इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। हिन्दुस्तान ‘सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी’ के गुप्त संगठन और सशस्त्र संघर्ष की परम्परा को ‘फारवर्ड ब्लाक’, कम्युनिस्ट पार्टी अथवा किसी भी पार्टी ने आगे नहीं
नहीं कर पाए। 1929 के लाहौर अधिवेशन में मुकम्मिल आज़ादी का प्रस्ताव पास हो जाने के बाद उन्होंने मज़दूरों, किसानों तथा नौजवानों को संगठित करने और समानान्तर सरकार बनाने का प्रस्ताव तो रखा, पर इस प्रस्ताव के रद्द हो जाने के बाद स्वयं उन्होंने भी इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। हिन्दुस्तान ‘सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी’ के गुप्त संगठन और सशस्त्र संघर्ष की परम्परा को ‘फारवर्ड ब्लाक’, कम्युनिस्ट पार्टी अथवा किसी भी पार्टी ने आगे नहीं