योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

बढ़ाया। परिणाम यह कि दूसरे विश्व यद्वु के बाद 1946 में जब क्रान्ति का ज़बरदस्त उभार आया तो कोई भी पार्टी उसका नेतृत्व करने में सक्षम नहीं थी। परिणाम यह कि कांगे्रस तथा मुस्लिम लीग के दलाल नेतृत्वों ने क्रान्ति की पीठ में छुरा घोंपकर ब्रिटिश साम्राज्यवाद से समझौता कर लिया।

क्रान्ति एक रचनात्मक ऐतिहासिक शक्ति है। उसमें राष्ट्र के उत्कृष्ट तत्त्व उभरकर ऊपर आते हैं, गले-सड़ें विकृष्ट तत्त्व झड़ जाते हैं और विचार का स्वस्थ विकास


1102 of 1197

बढ़ाया। परिणाम यह कि दूसरे विश्व यद्वु के बाद 1946 में जब क्रान्ति का ज़बरदस्त उभार आया तो कोई भी पार्टी उसका नेतृत्व करने में सक्षम नहीं थी। परिणाम यह कि कांगे्रस तथा मुस्लिम लीग के दलाल नेतृत्वों ने क्रान्ति की पीठ में छुरा घोंपकर ब्रिटिश साम्राज्यवाद से समझौता कर लिया।

क्रान्ति एक रचनात्मक ऐतिहासिक शक्ति है। उसमें राष्ट्र के उत्कृष्ट तत्त्व उभरकर ऊपर आते हैं, गले-सड़ें विकृष्ट तत्त्व झड़ जाते हैं और विचार का स्वस्थ विकास


1102 of 1197