होता है। हमारे देश में क्रान्ति को चूंकि निरन्तर टाला-बरसब स्थगित किया गया, परिणाम यह कि विचार एक स्थान पर आकर रूक गया। इससे साहित्य और संस्कृति का हृास हुआ और चिंतन को सही दिशा न मिलने से हम हृास ही को प्रगति
219 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
तथा उन्नति समझ बैठे है। इकबाल का जिक्र पहले आया है और अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए हम अब फिर इकबाल का उदाहरण देना चाहेंगे। यह उदाहरण इसलिए भी उचित है कि इकबाल ने जहां शुरू में
होता है। हमारे देश में क्रान्ति को चूंकि निरन्तर टाला-बरसब स्थगित किया गया, परिणाम यह कि विचार एक स्थान पर आकर रूक गया। इससे साहित्य और संस्कृति का हृास हुआ और चिंतन को सही दिशा न मिलने से हम हृास ही को प्रगति
219 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
तथा उन्नति समझ बैठे है। इकबाल का जिक्र पहले आया है और अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए हम अब फिर इकबाल का उदाहरण देना चाहेंगे। यह उदाहरण इसलिए भी उचित है कि इकबाल ने जहां शुरू में