अर्थात् पंजीवादी युग ने जो नये देवता निर्माण किए हैं उनमें सबसे बड़ा देवता देश है और उसका जो परिधान है वह धर्म का कफन है।
यह अमूर्त चिन्तन है, जिसका आधार रोमां रोलां तथा एच. जी. वेल्स इत्यादि आदर्शवादी विचारकों का ‘पवित्रतम आदर्श’ है। अब देखना यह है कि यह अमूर्त चिन्तन इकबाल को कहां ले गया।
विवेकानन्द द्वारा भारतीय राष्ट्र सोते सिंह को जगाने के उद्घोष से प्रभावित होकर जिस इकबाल ने ‘बाकी मगर है अब तक नामो-निशां हमारा’ का स्वर अलापा था,
अर्थात् पंजीवादी युग ने जो नये देवता निर्माण किए हैं उनमें सबसे बड़ा देवता देश है और उसका जो परिधान है वह धर्म का कफन है।
यह अमूर्त चिन्तन है, जिसका आधार रोमां रोलां तथा एच. जी. वेल्स इत्यादि आदर्शवादी विचारकों का ‘पवित्रतम आदर्श’ है। अब देखना यह है कि यह अमूर्त चिन्तन इकबाल को कहां ले गया।
विवेकानन्द द्वारा भारतीय राष्ट्र सोते सिंह को जगाने के उद्घोष से प्रभावित होकर जिस इकबाल ने ‘बाकी मगर है अब तक नामो-निशां हमारा’ का स्वर अलापा था,