और एंग्लस का उद्घोष है-‘दुनिया-भर के मज़दूरों एक हो जाओं ! जैसा कि हम पहले कह चुके हैं कि माक्र्सवाद असल में भौतिक अद्वैतवाद है। अपने इतिहास और संस्कृति से अनभिज्ञ मैकाॅले की शिक्षा पद्वति में ढले हुए ‘बामपंथी’ नेताओं तथा ‘प्रगतिशील’ लेखकों ने इस उद्घोष का भी गलत अर्थ लगाया और राष्ट्रीयता को नकारकर अमूर्त चिन्तन ही को बढ़ावा दिया। हाल ही में कश्मी़र के उग्र बामपंथी रामप्यारे सराफ की पुस्तक ‘प्रजेन्ट इंडियन सोसाइटी’ (आज
और एंग्लस का उद्घोष है-‘दुनिया-भर के मज़दूरों एक हो जाओं ! जैसा कि हम पहले कह चुके हैं कि माक्र्सवाद असल में भौतिक अद्वैतवाद है। अपने इतिहास और संस्कृति से अनभिज्ञ मैकाॅले की शिक्षा पद्वति में ढले हुए ‘बामपंथी’ नेताओं तथा ‘प्रगतिशील’ लेखकों ने इस उद्घोष का भी गलत अर्थ लगाया और राष्ट्रीयता को नकारकर अमूर्त चिन्तन ही को बढ़ावा दिया। हाल ही में कश्मी़र के उग्र बामपंथी रामप्यारे सराफ की पुस्तक ‘प्रजेन्ट इंडियन सोसाइटी’ (आज