माक्र्सवाद एक वैज्ञानिक सिद्वान्त है। उसे सिर्फ उद्वत करने से काम नहीं चलेगा। उसे भारत की ठोस परिस्थितियों पर लागू करके यह जानना होगा कि भारत आज क्या है, कल क्या था, सौ बरस पहले क्या था और हज़ार बरस पहले क्या था। अतीत को समझ लेने के बाद ही वर्तमान का निर्माण सम्भव है। इसके लिए अपने इतिहास और दर्शन का ज्ञान आवश्यक है, वेद-उपनिषद्, रामायण, महाभारत, कपिल, कणाद, गौतम, चाणक्य, शंकराचार्य, रामानुज, चैतन्य, कबीर, नानक, रामकृष्ण
माक्र्सवाद एक वैज्ञानिक सिद्वान्त है। उसे सिर्फ उद्वत करने से काम नहीं चलेगा। उसे भारत की ठोस परिस्थितियों पर लागू करके यह जानना होगा कि भारत आज क्या है, कल क्या था, सौ बरस पहले क्या था और हज़ार बरस पहले क्या था। अतीत को समझ लेने के बाद ही वर्तमान का निर्माण सम्भव है। इसके लिए अपने इतिहास और दर्शन का ज्ञान आवश्यक है, वेद-उपनिषद्, रामायण, महाभारत, कपिल, कणाद, गौतम, चाणक्य, शंकराचार्य, रामानुज, चैतन्य, कबीर, नानक, रामकृष्ण