योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

परमहंस और विवेकानन्द-सब हमारे हैं। हमें उनकी ऐतिहासिक भौतिकवादी दृष्टि से व्याख्या करनी है। वह व्याख्या ही माक्र्सवाद का मूर्त रूप होगी। माक्र्सवाद के स मूर्त रूप को हमारी जनता सहज से ग्रहण करेगी। और उसे क्रान्तिकारी भौतिक शक्ति में बदल देगी। लेनिन ने ऐसा किया और वे सफल हुए। माओत्से तुंग और होची मिहृ ने ऐसा किया तो उन्हें भी सफलता मिली। सांस्कृतिक परम्परा से जुड़कर ही लोग क्रान्तिकारी बनते हैं। माओत्से तंुग ने तो यहां


1111 of 1197

परमहंस और विवेकानन्द-सब हमारे हैं। हमें उनकी ऐतिहासिक भौतिकवादी दृष्टि से व्याख्या करनी है। वह व्याख्या ही माक्र्सवाद का मूर्त रूप होगी। माक्र्सवाद के स मूर्त रूप को हमारी जनता सहज से ग्रहण करेगी। और उसे क्रान्तिकारी भौतिक शक्ति में बदल देगी। लेनिन ने ऐसा किया और वे सफल हुए। माओत्से तुंग और होची मिहृ ने ऐसा किया तो उन्हें भी सफलता मिली। सांस्कृतिक परम्परा से जुड़कर ही लोग क्रान्तिकारी बनते हैं। माओत्से तंुग ने तो यहां


1111 of 1197