तक कह दिया है-‘‘संस्कृति-विहीन सेना जड़बुद्वि सेना है, वह शत्रु को पराजित नहीं कर सकती।’’
गंगा युग-युग से अविरल गति के साथ इस धरती पर बह रही है उसकी धारा को किसी एक विशेष स्ािन की धारा से अलग नहीं किया जा सकता ।
अपने विशिष्ट उद्गम और विशिष्ट मार्ग से बहने के कारण गंगा के जल में जो एक विशिष्ट गुण है, वह दजला, वोल्गा अथवा यांग्सी के जल में नहीं। और बोल्गा और यांग्सी के पानी में जो विशिष्ट गुण है वह गंगा के पानी में नहीं।
तक कह दिया है-‘‘संस्कृति-विहीन सेना जड़बुद्वि सेना है, वह शत्रु को पराजित नहीं कर सकती।’’
गंगा युग-युग से अविरल गति के साथ इस धरती पर बह रही है उसकी धारा को किसी एक विशेष स्ािन की धारा से अलग नहीं किया जा सकता ।
अपने विशिष्ट उद्गम और विशिष्ट मार्ग से बहने के कारण गंगा के जल में जो एक विशिष्ट गुण है, वह दजला, वोल्गा अथवा यांग्सी के जल में नहीं। और बोल्गा और यांग्सी के पानी में जो विशिष्ट गुण है वह गंगा के पानी में नहीं।