योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

इसके इस विशिष्ट गुण को नकारकर सबके पानी को समान बना देना सम्भव नहीं, बल्कि जल के इस विशिष्ट गुण को समझ लेना ही, जिस पर वह बहता है, उस धरती संबंधी सम्यक् ज्ञान है।

गंगा की धारा ही की तरह हमारे देश में विचार की धारा भी युग-युग से अविरल गति के साथ बहती चली आ रही है। इस धारा को किसी भी स्थान पर बीच में काट देना सम्भव नहीं है। विशिष्ट भौगोलिक, ऐतिहासिक और सामाजिक

221 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

परिस्थितियों के कारण इसके


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इसके इस विशिष्ट गुण को नकारकर सबके पानी को समान बना देना सम्भव नहीं, बल्कि जल के इस विशिष्ट गुण को समझ लेना ही, जिस पर वह बहता है, उस धरती संबंधी सम्यक् ज्ञान है।

गंगा की धारा ही की तरह हमारे देश में विचार की धारा भी युग-युग से अविरल गति के साथ बहती चली आ रही है। इस धारा को किसी भी स्थान पर बीच में काट देना सम्भव नहीं है। विशिष्ट भौगोलिक, ऐतिहासिक और सामाजिक

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