विकास की भी एक विशिष्ट प्रक्रिया है। हमें इस विशिष्टता को समझना होगा और अपने चिंतन का सूत्र चिंतन का सूत्र इस विचारधारा से जोड़कर विवेकानन्द उसे जहां लाकर छोड़ गए हैं, उससे आगे बढ़ाना होगा। निरा माक्र्सवाद बघारने से कोई प्रयोजन सिद्व नहीं होता। निस्संदेह आज के युग में माक्र्सवाद, लेनिनवाद और माओत्से तुंग विचारधारा का ज्ञान आवश्यक है, लेकिन अपनी सांस्कृतिक परम्परा को समझना और उससे जुड़ना और भी आवश्यक है। विवेकानन्द को प्रतिक्रियावादी
विकास की भी एक विशिष्ट प्रक्रिया है। हमें इस विशिष्टता को समझना होगा और अपने चिंतन का सूत्र चिंतन का सूत्र इस विचारधारा से जोड़कर विवेकानन्द उसे जहां लाकर छोड़ गए हैं, उससे आगे बढ़ाना होगा। निरा माक्र्सवाद बघारने से कोई प्रयोजन सिद्व नहीं होता। निस्संदेह आज के युग में माक्र्सवाद, लेनिनवाद और माओत्से तुंग विचारधारा का ज्ञान आवश्यक है, लेकिन अपनी सांस्कृतिक परम्परा को समझना और उससे जुड़ना और भी आवश्यक है। विवेकानन्द को प्रतिक्रियावादी