अपने मन-प्राण से यह भी निश्चय कर लिया कि इसी जीवन में सत्य को प्राप्त करना होगा। नहीं तो इसी प्रयत्न में प्राण दे देने होंगे।’’ (पृष्ठ 83-84)
सुरेन्द्रनाथ मित्र रामकृष्ण परमहंस के भक्त थे और वे शिमला मोहल्ला में ही रहते थे। नवम्बर 1881 के एक दिन उन्होंने रामकृष्ण परमहंस को अपने मकान पर बुलाया और इस उपलक्ष में एक अनन्दोत्सव का आयोजन किया। कोई अच्छा गायक न मिलने के कारण उन्होंने अपने पड़ोसी नरेन्द्रनाथ को बुला लिया। रामकृष्ण
अपने मन-प्राण से यह भी निश्चय कर लिया कि इसी जीवन में सत्य को प्राप्त करना होगा। नहीं तो इसी प्रयत्न में प्राण दे देने होंगे।’’ (पृष्ठ 83-84)
सुरेन्द्रनाथ मित्र रामकृष्ण परमहंस के भक्त थे और वे शिमला मोहल्ला में ही रहते थे। नवम्बर 1881 के एक दिन उन्होंने रामकृष्ण परमहंस को अपने मकान पर बुलाया और इस उपलक्ष में एक अनन्दोत्सव का आयोजन किया। कोई अच्छा गायक न मिलने के कारण उन्होंने अपने पड़ोसी नरेन्द्रनाथ को बुला लिया। रामकृष्ण