भली-भान्ति समझते थे कि विेदशी भाषा में चाहे कोई कितनी ही जान खपाये, कितनी ही विद्वता प्राप्त कर ले, उसमें उच्च कोटी की उत्कृष्ट रचना सम्भव नहीं है। मौलिकता और प्रतिभा का विकास अपनी मातृभाषा ही में सम्भव है और हृदयगत भावनाओं की सहज अभिव्यक्ति उसी में सम्भव है।
लार्ड मैकाले द्वारा हम पर अंगे्रज़ी आरोपित करना हमारी राष्ट्रीयता को नष्ट करने का समझा-सोचा षड्यंत्र है। मद्रास में ‘भारत का भविष्य’ नाम के अपने भाषण में वे कहते हैं:
भली-भान्ति समझते थे कि विेदशी भाषा में चाहे कोई कितनी ही जान खपाये, कितनी ही विद्वता प्राप्त कर ले, उसमें उच्च कोटी की उत्कृष्ट रचना सम्भव नहीं है। मौलिकता और प्रतिभा का विकास अपनी मातृभाषा ही में सम्भव है और हृदयगत भावनाओं की सहज अभिव्यक्ति उसी में सम्भव है।
लार्ड मैकाले द्वारा हम पर अंगे्रज़ी आरोपित करना हमारी राष्ट्रीयता को नष्ट करने का समझा-सोचा षड्यंत्र है। मद्रास में ‘भारत का भविष्य’ नाम के अपने भाषण में वे कहते हैं: