‘‘किसी भी दूसरे देश की अपेक्षा भारत की समस्याएं अधिक जटिल और गुरूतर
223 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
हैं। जाति-धर्म, भाषा, शासन प्रणाली-यही एक साथ मिलकर एक राष्ट्र की सृष्टि करते हैं। यदि एक-एक जाति को लेकर हमारे राष्ट्रसे तुलना की जाये तो हमें देखेंगे कि जिन उपादानों से संसार के दूसरे राष्ट्र संगठित हुए हैं, वे संख्या में यहां के उपादानों से कम हैं। यहां आर्य हैं, द्रविड़ हैं, तातार हैं, तुर्क हैं, मुगल हैं, यूरोपीय हैं,
‘‘किसी भी दूसरे देश की अपेक्षा भारत की समस्याएं अधिक जटिल और गुरूतर
223 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
हैं। जाति-धर्म, भाषा, शासन प्रणाली-यही एक साथ मिलकर एक राष्ट्र की सृष्टि करते हैं। यदि एक-एक जाति को लेकर हमारे राष्ट्रसे तुलना की जाये तो हमें देखेंगे कि जिन उपादानों से संसार के दूसरे राष्ट्र संगठित हुए हैं, वे संख्या में यहां के उपादानों से कम हैं। यहां आर्य हैं, द्रविड़ हैं, तातार हैं, तुर्क हैं, मुगल हैं, यूरोपीय हैं,