जब तब यदि सम्भव हो तो हमारी जाति के सभी मनुष्य संस्कृत के अच्छे विद्वान न हो जायें। यह कठिनाई तुम्हारी समझ में आ जायेगी, जब मैं कहूंगा कि आजीवन इस संस्कृत भाषा का अध्ययन करने पर भी जब मैं इसकी कोई नई पुस्तक उठाता हूं तब वह मुझे बिलकुल नई जान पड़ती है। अब सोचो कि जिन लोगों ने कभी विशेष रूप से इस भाषा का अध्ययन करने का समय नहीं पाया, उनके लिए यह भाषा कितनी अधिक क्लिष्ट होंगी। अतः मनुष्यों की बोल-चाल की भाषा में विचारों की
जब तब यदि सम्भव हो तो हमारी जाति के सभी मनुष्य संस्कृत के अच्छे विद्वान न हो जायें। यह कठिनाई तुम्हारी समझ में आ जायेगी, जब मैं कहूंगा कि आजीवन इस संस्कृत भाषा का अध्ययन करने पर भी जब मैं इसकी कोई नई पुस्तक उठाता हूं तब वह मुझे बिलकुल नई जान पड़ती है। अब सोचो कि जिन लोगों ने कभी विशेष रूप से इस भाषा का अध्ययन करने का समय नहीं पाया, उनके लिए यह भाषा कितनी अधिक क्लिष्ट होंगी। अतः मनुष्यों की बोल-चाल की भाषा में विचारों की