योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

पढ़ी थी और प्राचीन शास्त्रों का अध्ययन किया था, इसीलिए भारत को सभ्य बनाने की डींग हांकने वालों का वे मुंहतोड़ जवाब दे पाये थे, इसीलिए शिकागो धर्म-महासभा, इंग्लैंड और अमरीका में उनका विरोध करने वाले पादरियों-सादरियों को धूल चाटनी पड़ी थी और इसीलिए उन्हें आज भी भारत में उस समय के किसी भी विचारक अथवा सुधारक से अधिक सम्मान प्राप्त हैं। अंगे्रज़ साम्राज्यवादियों ने भी इस एक मात्र रहस्य को समझ लिया था, इसीलिए उन्होंने हम पर अंगे्रजी


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पढ़ी थी और प्राचीन शास्त्रों का अध्ययन किया था, इसीलिए भारत को सभ्य बनाने की डींग हांकने वालों का वे मुंहतोड़ जवाब दे पाये थे, इसीलिए शिकागो धर्म-महासभा, इंग्लैंड और अमरीका में उनका विरोध करने वाले पादरियों-सादरियों को धूल चाटनी पड़ी थी और इसीलिए उन्हें आज भी भारत में उस समय के किसी भी विचारक अथवा सुधारक से अधिक सम्मान प्राप्त हैं। अंगे्रज़ साम्राज्यवादियों ने भी इस एक मात्र रहस्य को समझ लिया था, इसीलिए उन्होंने हम पर अंगे्रजी


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