आरोपित की और इसीलिए आर्य और ब्राह्यणों के विरूद्व घृणा फेलाई। अतएव हमारे वे शिक्षित बंधु जो इस एक मात्र रहस्य को समझने में असमर्थ हैं और सिर्फ विदेशी लेखकों की पुस्तकें चाटकर आधुनिक तथा प्रगतिशील बने घूमते हैं, बुद्व को इसलिए प्रगतिशील मान लेते हैं कि उसने संस्कृत की उपेक्षा करके अपने मत का प्रचार पाली भाषा में किया और विवेकानंद को इसलिए प्रतिक्रियावादी गरदानते हैं कि उन्होंने संस्कृत पढ़ने और अतीत को समझने की बात कही। हमारे ये कम-समझ बंधु विवेकानंद का उत्तर सुनें:
आरोपित की और इसीलिए आर्य और ब्राह्यणों के विरूद्व घृणा फेलाई। अतएव हमारे वे शिक्षित बंधु जो इस एक मात्र रहस्य को समझने में असमर्थ हैं और सिर्फ विदेशी लेखकों की पुस्तकें चाटकर आधुनिक तथा प्रगतिशील बने घूमते हैं, बुद्व को इसलिए प्रगतिशील मान लेते हैं कि उसने संस्कृत की उपेक्षा करके अपने मत का प्रचार पाली भाषा में किया और विवेकानंद को इसलिए प्रतिक्रियावादी गरदानते हैं कि उन्होंने संस्कृत पढ़ने और अतीत को समझने की बात कही। हमारे ये कम-समझ बंधु विवेकानंद का उत्तर सुनें: