कितनी ही बार मुझसे कहा गया है कि अतीत की ओर नज़र डालने से सिर्फ मन की अवनति ही होती है इससे कोई फल नहीं होता, अतः हमें भविष्य की
225 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
ओर दृष्टि रखनी चाहिए। यह सच है। परन्तु अतीत ही से भविष्य का निर्माण होता है। अतः जहां तक हो सके, अतीत की ओर देखो, पीछे जो चिंतन-निर्झर बह रहा है, आकंठ उसका जल पिओ और उसके बाद सामने देखो और भारत को उज्ज्वलतर, महत्तर और पहले से और भी ऊंचा उठाओ। हमारे पूर्व महान
कितनी ही बार मुझसे कहा गया है कि अतीत की ओर नज़र डालने से सिर्फ मन की अवनति ही होती है इससे कोई फल नहीं होता, अतः हमें भविष्य की
225 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
ओर दृष्टि रखनी चाहिए। यह सच है। परन्तु अतीत ही से भविष्य का निर्माण होता है। अतः जहां तक हो सके, अतीत की ओर देखो, पीछे जो चिंतन-निर्झर बह रहा है, आकंठ उसका जल पिओ और उसके बाद सामने देखो और भारत को उज्ज्वलतर, महत्तर और पहले से और भी ऊंचा उठाओ। हमारे पूर्व महान