ने बनाने का प्रयत्न किया। इसके बिना राष्ट्रीय एकता, देशभक्ति तथा प्रगति की बात करना व्यर्थ है। संस्कृत पढत्रना इसलिए भी आवश्यक है कि वह भारत की समस्त भाषाओं के लिए शब्दावली का óोत है। पंजाबी, गुजराती, मराठी, बंगाली और आसामी इत्यादि आर्य-परिवार के भाषाएं तो संस्कृत से निकली ही हैं, इसके अतिरिक्त तमिल, तेलुगु मलयालम, कन्नड़ इत्यादि द्रविड़ परिवार की भाषाएं भी अधिकांश शब्द, मिथक और रूपक संस्कृत ही से लेती है। दक्षिण के किसी
ने बनाने का प्रयत्न किया। इसके बिना राष्ट्रीय एकता, देशभक्ति तथा प्रगति की बात करना व्यर्थ है। संस्कृत पढत्रना इसलिए भी आवश्यक है कि वह भारत की समस्त भाषाओं के लिए शब्दावली का óोत है। पंजाबी, गुजराती, मराठी, बंगाली और आसामी इत्यादि आर्य-परिवार के भाषाएं तो संस्कृत से निकली ही हैं, इसके अतिरिक्त तमिल, तेलुगु मलयालम, कन्नड़ इत्यादि द्रविड़ परिवार की भाषाएं भी अधिकांश शब्द, मिथक और रूपक संस्कृत ही से लेती है। दक्षिण के किसी