योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

भी होटल में आप ‘नीरम’ कहिए तो अपढ़ से अढ़ बैरा पानी लाकर हाजिर कर देगा। संस्कृत अतीत में राष्ट्रीय एकता का आधार रही है, शंकराचार्य ने अपना प्रचार संस्कृत में किया। दयानंद का जन्म भी दक्षिण में हुआ। वे भी अपना प्रचार संस्कृत में करते थे। लेकिन 1873 में वे कलकत्ता गये तो ब्रह्यसमाज वालों को बंगला का प्रयोग करते देखा, तो उन्होंने भी जनसाधारण तक अपनी बात पहुंचाने के लिए हिन्दी को अपनाया और आर्य समाज का धार्मिक गं्रथ ‘सत्यार्थ प्रकाश’ हिन्दी में लिखा।


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भी होटल में आप ‘नीरम’ कहिए तो अपढ़ से अढ़ बैरा पानी लाकर हाजिर कर देगा। संस्कृत अतीत में राष्ट्रीय एकता का आधार रही है, शंकराचार्य ने अपना प्रचार संस्कृत में किया। दयानंद का जन्म भी दक्षिण में हुआ। वे भी अपना प्रचार संस्कृत में करते थे। लेकिन 1873 में वे कलकत्ता गये तो ब्रह्यसमाज वालों को बंगला का प्रयोग करते देखा, तो उन्होंने भी जनसाधारण तक अपनी बात पहुंचाने के लिए हिन्दी को अपनाया और आर्य समाज का धार्मिक गं्रथ ‘सत्यार्थ प्रकाश’ हिन्दी में लिखा।


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